ग्वालियर में आयोजित राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता बना नौनिहालों का टॉर्चर चैम्बर,
दूषित पेयजल,गंदे टॉयलेट,बिजली गुल के साथ निरंकुश डीईओ के मनमाने रवैए से परेशान छात्र
ग्वालियर में शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ी
चार संभागों के प्रतिभागियों के लिए केवल एक शौचालय
जहाँ रुके वहाँ की बिजली गुल_बिल नहीं भरा
छात्रों के पीने के लिए भी गंदा पानी
मध्यप्रदेश के सभी संभागों से आए प्रतिभागियों ने बयान किया दर्द
जिला शिक्षा अधिकारी की उदासीनता से लगेगा ग्वालियर की छवि को बट्टा
शिकायत करने का भी कोई असर नहीं
कोच की शिकायत डीईओ फोन ही नहीं उठातीं
अपने घमंड में चूर डीईओ में अनुभव की कमी
बाहर से आए छात्रों के लिए भी कोई जिम्मेदारी नहीं
अव्यवस्थाओं पर एक चलते कई छात्र होटल में रुकने को मजबूर
राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में भाग ले रहे दस संभागों के छात्र
ग्वालियर के तरण पुष्कर में आयोजित हो रही शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता
डाइविंग तैराकी और वाटर पोलो खेलों में भाग ले रहे छात्र
छात्रों रहने खाने की व्यवस्था में 6 किलोमीटर की दूरी
ट्रांसपोर्टेशन में भी जिला शिक्षा विभाग ने खड़े किए हाथ
अपने पैसे खर्च करके आवागमन कर रहे छात्र
स्कूलों के कोच भी जिला शिक्षा अधिकारी से मायूस
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शासकीय स्कूलों के छात्रों को बड़ा मंच देने किया जाता है शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन
जिला पंचायत सीईओ ने सभी व्यवस्थाएं सुधारने का दिया आश्वासन
ग्वालियर में आयोजित हो रही चार दिवसीय राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश के सभी संभागों से आए प्रतिभागी स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा ठहरने और आवागमन में आ रहीं अव्यवस्थाओं को लेकर परेशान हैं। वे परेशान इसलिए भी हैं कि यहाँ जिला शिक्षा अधिकारी जिला क्रीड़ा अधिकारी से लेकर कोई भी अधिकारी कानों में रुई डालकर बैठे हैं। और ये हम नहीं कह रहे ये आप खुद बच्चों की जुबानी सुनिए। मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बच्चों ने शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली और दावों की पोल खोल कर रख दी है। हालांकि इस मामले में हमने जिला शिक्षा अधिकारी स्वीटी मंगल से बात करने की कोशिश की लेकिन जैसा कि सर्वविदित है कि विभाग के हर मामले में चुप्पी साधने वाली स्वीटी मंगल ने इस पर भी फोन नहीं उठाया। वहीं दूसरी ओर शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आए बच्चों के साथ उनके कोचेस ने भी उन हॉस्टलों में गंदगी और पीने का पानी नहीं मिलने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि ग्वालियर जिला पंचायत सीईओ सुजान सिंह रावत ने इस मामले में स्वीकार करते हुए कहा है कि अव्यवस्थाओं की शिकायत मिली थी जिन्हें दुरुस्त कर लिया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि सरकार द्वारा बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें बड़ा मंच देने के लिए ग्वालियर जैसे संभागीय मुख्यालय में अव्यवस्थाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा। या फिर मध्यप्रदेश के सभी जिलों से आए बच्चे अपने अपने जिलों में जाकर ग्वालियर की क्या छवि प्रचारित करेंगे ये विचारणीय प्रश्न है।
