सिंधिया रियासत कालीन मेले को खत्म कर रहा भ्रष्ट अफसरों और दलालों का गठजोड़…बाहरी उद्योगपतियों के लिए बैन हुआ व्यापार मेला।
देखिए क्या है पूरा मामला…
एंकर -: ग्वालियर के ऐतिहासिक माधवराव सिंधिया व्यापार मेले में बाहरी उद्योगपतियों को जगह नहीं मिलेगी। ये हम नहीं कह रहे ये कहना ग्वालियर व्यापार मेले के बोर्ड का। एक ओर जहाँ मुख्यमंत्री सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में उद्योग धंधों को गति देने के लिए प्रयासरत हैं। वहीं दूसरी तरफ ग्वालियर मेरे के कर्ताधर्ता मध्यप्रदेश शासन के आदेशों का उल्लंघन करते नजर आ रहे हैं। मेला सचिव टी आर रावत की मानें तो अब मेरे में बाहरी ऑटोमोबाइल डीलर व्यवसाय नहीं कर सकेंगे। बाहर से आने वाले उद्योगपतियों के लिए मेला बैन है। सतना से ग्वालियर मेले पहुँचे हेमराज पाठक मेले में व्यापार करने के लिए पिछले दो वर्ष से चक्कर लगा रहे हैं। वे मध्य प्रदेश सरकार का गजट नोटिफिकेशन भी दिखाते हैं और हाई कोर्ट के ऑर्डर भी कि जब उज्जैन में बाहरी व्यापारी आसानी से अपना शोरूम खोल सकते हैं तो यहाँ क्यों नहीं। यहाँ देखिए कि किस तरह से ग्वालियर के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट भी इन व्यापारियों को बातों को अनसुनी करके आगे बढ़ जाते हैं वहीं इन उद्योगपतियों ने संभाग आयुक्त मनोज खत्री से भी गुहार लगाई लेकिन यहाँ से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। ग्वालियर व्यापार मेले में अपना की शोरूम खोलने की चाहत लिए यह व्यापारी सुविधा शुल्क यानी रिश्वत देने के लिए भी तैयार हैं जैसा कि ग्वालियर मेले की पुरानी परंपरा है सूत्रों की माने तो यहां 8 से 10000 की दुकान की कीमत डेढ़ से 2 लाख तक हो जाती है। यहां दुकान किस्मत से नहीं कीमत से मिलती हैं और वह कीमत मेला प्राधिकरण में बैठे दलाल और उनकी कृपा पात्र व्यापारी तय करते हैं। यही वजह है की ग्वालियर मेले में ग्राहकों के साथ बाहरी दुकानदारों को भी जमकर लूटा जाता है। सिंधिया रियासत कालीन मेले के स्वरूप को खत्म करने की साजिशें जारी हैं क्योंकि यहां सबको पैसा चाहिए सब पैसे से बिकते हैं चाहे वह अधिकारी हो नेता हो या व्यवसायी।
