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जनता के लिए गड्ढों की डगर,बापों के लिए बारिश में सड़क


गड्ढे वाले शहर में बापों का बोलबाला
ग्वालियर की जनता की किस्मत में गड्ढे ही लिखे हैं चाहो वो बरसात में हों सर्दी हो या गर्मी क्योंकि यहाँ सड़कें जनता के लिए नहीं उन बापों के लिए बनती हैं जो जनता के सिर पर बैठे हैं, और जनता भी इसी व्यवहार की हकदार है क्योंकि शहर के ये दो चार नेता किसीके बॉस हैं तो किसीके महाराज किसीके जात भाई और जात भाइयों को कहाँ कुछ कहा जाता है और महाराज के आगे तो गुहार लगाई जाती है और बॉस के गुर्गें ही जनता को बॉस तक पहुँचने नहीं देते..
देखिए खास रिपोर्ट
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किस्सा ए गढ्ढा
ग्वालियर नरक निगम माफ़ कीजिए नगर निगम के अति कर्मठ और मेहनती निगम कमिश्नर और उनकी टीम का नया कारनामा सामने आया है, ये हम आपको बताएँगे लेकिन उससे पहले जान लें कि ग्वालियर शहर में बड़े बड़े खतरनाक गड्ढों का मायाजाल इस कदर फैला है‌ कि स्मार्ट हो रहे शहर में नगर निगम प्रशासन द्वारा आबादी कम करने और रोजगार के अवसर पैदा करने के इस मायाजाल से आप बच नहीं सकते, शहर में यदि यमराज को भी किसी को लेने के लिए आना पड़े तो उनका भैंसा भी बेचारा सोच समझ कर अपने पांव ज़मीन पर रखता है,
इन तस्वीरों को ध्यान से देखिए यहाँ आपको जानलेवा गड्ढे नजर आएंगे लेकिन ये गड्ढे नहीं रोजगार की अपार संभावनाएं पैदा करने वाले संसाधन हैं हम आपको बताते हैं कि ये रोजगार कैसे देते हैं,
देखिए यदि आप गड्ढे में पैदल चलते हुए गिरे तो डॉक्टर को रोजगार मिलता है, यदि आप वाहन पर हैं और गड्ढे में गिर गए तो गाड़ी मैकेनिक और डॉक्टर दोनों को रोजगार उपलब्ध होगा और यदि आप अपनी गलती से गड्ढे में गिर कर प्राण त्याग देते हैं तो सोने पे सुहागा क्योंकि आपके द्वारा छोड़ी गई जिंदगी भर की कमाई आपके परिजनों को मिलेगी और आपके क्रिया कर्म करने के लिए सामग्री बेचने के लिए दुकान खोले बैठे दुकानदार के बच्चे आपको मरने के बाद भी दुआ देंगे, तो मान कर चलिए जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की जरूरत ही नहीं है सरकार ने हर गली मोहल्ले सड़कों पर गड्ढे खुदवा दिए हैं और ये आपको पैसा कमाने का अवसर भी देते हैं तो खबरदार जो आज के बाद कभी आपने ग्वालियर नगर निगम को नरक निगम कहा तो….

जनता की कमाई बारिश में उड़ाई
अब आपको बताते हैं नगर निगम का नया कारनामा जैसे अपने बाप के आगमन के मौके पर एक नालायक बेटा अपनी गलतियां छुपाने के लिए घर को चका चक कर देता है पूरे घर को सजा देता है ठीक वैसे ही ग्वालियर का निगम प्रशासन भी सड़कों को भरी बारिश में दुरुस्त करने में जुटा है, रिमझिम बारिश में गर्म डामर की सड़क डाली जा रही है, जब हमने काम कराने वाले ठेकेदार से पूछा कि भैया ये डामर बारिश में बहेगा नहीं तो उनका कहना था कि बारिश कहाँ है जबकि ठेकेदार साहब खुद बारिश से बचने के लिए कपड़ा ओढ़कर मुँह छुपा रहे थे मतलब उन्हें भी पता है कि ये डामर का पेंच वर्क एक दिन नहीं टिकेगा, लेकिन करें तो क्या आखिर बाप आ रहे हैं नौकरी तो बजानी पड़ेगी अच्छा अच्छा‌ दिखाना जो है अब ये मत पूछने लगना कि बाप का नाम क्या है क्योंकि इस शहर में नगर निगम जिला प्रशासन के अंडर में आने वाले विभागों का एक नहीं बहुत सारे बाप हैं जो समय समय पर अपनी केवल उपस्थिति दर्ज कराने आते हैं और हाँ वसूली कितनी हुई इसका भी तो हिसाब देना पड़ता है टूटे फ़ूटे स्कूटर चलाने वाले पंचर की दुकान चलाने वाले लोग ऐसे ही थोड़े अरबपति बन गए हैं और अधिकारियों को तो वैसे भी खास मतलब नहीं इस शहर से क्योंकि उन्हें दो तीन साल‌ तक नौकरी बचानी है और हर लाट साहब अपने हिसाब से प्रयोग करता है और निकल जाता है और नेताओं को तो बस माल चाहिए जनता जाए भाड़ में।

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