
ये कैसी माई की आराधना….?
ये खुद को सनातनी हिन्दू कहते हैं..?

शारदेय नवरात्र के पहले दिन राजपूत स्थापना दिवस के मौके पर करणी माता की तस्वीर के समक्ष शराब के नशे में लहराते और नाच करने वाले और कोई नहीं ये सनातनी हिन्दू हैं खुद को क्षत्रिय भी कहते हैं लेकिन गलती इनकी भी नहीं है किसी भी धार्मिक त्यौहार सामाजिक कार्यक्रम के बहाने शराबखोरी की छूट देने वाला ये समाज भी उतना ही दोषी है, नवरात्र के प्रथम दिन जब पूरा देश माँ की आराधना में लीन है उस समय नशेड़ियों का यह जाम पर जाम टकराने का वीडियो मन में कई सवाल खड़े कर देता है। क्या सचमुच ये सनातनी हिन्दू हैं क्या राजपूतों की वो पुरानी की आन बान शान केवल शराब के नशे की मोहताज हो गई है मांँ करणी इनकी गलतियों को क्षमा करें लेकिन नवरात्र के पहले दिन क्षत्रिय समाज का यह प्रदर्शन देश भर में क्या संदेश देगा, अहम बात ये है कि ग्वालियर चम्बल अंचल रणबांकुरों की धरती रही है और जब क्षत्रिय समाज ही नशे में डूबा हो तो देश की रक्षा में अग्रणी रहे इस समाज के नक्शे कदम पर चलने वाले युवाओं का क्या होगा, जहाँ एक ओर सनातन संस्कृति पर जब दसों दिशाओं से लगातार प्रहार किए जा रहे हों उस समय ऐसी तस्वीरें मन को विचलित करती हैं और विधर्मियों को बोलने का मौका देती हैं।
सनातन धर्म संस्कृति पर चहुंओर प्रहार,
अब भी नहीं सुधरे तो कब सुधरेंगे…???
उम्मीद है कि इस खबर के बाद पूरे सनातनी हिन्दू समाज में कुछ लोग तो होंगे जिन्हें शर्म आएगी और नशा छोड़कर सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा में अपना योगदान देंगे क्योंकि वर्तमान पीढ़ी का नशे में डूबना भावी पीढ़ी को खत्म करने जैसा होगाकभी बैठकर चिंतन कीजिए क्या भावी पीढ़ी को हम क्या देकर जाएँगे।
