
टेलीकॉम में सिंधिया की दिलचस्पी खत्म हो रही है,विकास के दावों के बीच BSNL की अनदेखी
देखिए हमारी खास रिपोर्ट
देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनी BSNL क्या डूब जाएगी, ये सवाल उस समय उठता है जब सालों से बदहाली की मिसाल बने BSNL की जिम्मेदारी देश के सक्षम नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को दी गई थी लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी BSNL को बर्बादी के इस भंवर से निकालने के लिए सरकार के पास न कोई प्लान और न ही फंड। लेकिन BSNL के बरसों पुराने उपभोक्ताओं को सिंधिया से जो उम्मीद थी जो अब नाउम्मीदी में बदल चुकी है।
BSNL पर कब नजरे इनायत करेंगे विकास के मसीहा सिंधिया…?
ग्वालियर चम्बल अंचल में विकास के मसीहा के माने जाने वाले विकास पुरुष केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास BSNL के विकास का कोई प्लान नहीं है और ये हम नहीं कह रहे ये कहना है BSNL से परेशान हो चुके उपभोक्ताओं का जो वर्षों से BSNL का उपयोग कर रहे हैं। अब हालात ये हैं कि BSNL की कमियां या कहें उनकी लाचारी कि सालों बाद भी देश की सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी अब अंतिम साँसें गिन रही है। एक समय BSNL के मुरीद रहे अधिकांश ग्राहक BSNL छोड़कर दूसरी टेलीकॉम कंपनियों का दामन थाम चुके हैं
हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया को दूरसंचार मंत्रालय की कमान सम्हालने के बाद अब तक BSNL का हालत जस की तस है केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने भाषण में हर विभाग की बातें करते नजर आते हैं लेकिन अपने विभाग की बात कभी नहीं करते।
वे पिछले शासनकाल के अपने विभाग के कामों की चर्चा करते हैं लेकिन दूरसंचार विभाग की बात नहीं करते। भाजपा के ही एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सिंधिया अपने काम से स्वयं भी संतुष्ट नहीं हैं इसलिए इसकी चर्चा नहीं करते।
वहीं जब हमने BSNL के पुराने उपभोक्ताओं से चर्चा की तो उनका कहना था कि सिंधिया जी द्वारा इस मंत्रालय को सम्हालने पर जितनी उम्मीद जागी थी वो अब धराशाई हो गई हैं लगता है सिंधिया जी की इस मंत्रालय में रुचि नहीं है यही वजह है कि सिंधिया जी कभी अपने मंत्रालय की बात नहीं करते हैं।
हमारा मानना है कि सिंधिया जी को दूरसंचार मंत्रालय सम्हाले चंद महीने हुए हैं विकास की बातें करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया BSNL की नैया पार लगाने के लिए आवश्यक कदम जरूर उठाएँगे लेकिन जिस तरह से अपने मंत्रालय के उनकी प्रति उदासीनता नजर आ रही है इससे लगता नहीं कि BSNL का समय बदलेगा क्योंकि टेलीकॉम सेक्टर की प्रायवेट कंपनियों के मुकाबले BSNL बहुत ज्यादा कमजोर नजर आती है।
