गाँव के बब्बा ने खोल दी देश के सिस्टम की पोल
बुजुर्ग की एक कविता ने बजा दी पूरे देश के सिस्टम की बैंड एक गाँव की चौपाल पर बेवजह बैठे बुजुर्ग का दर्द समझा जा सकता है जो उसने एक कविता के माध्यम से बयां किया है। ये केवल कविता नहीं एक हकीकत है देश की समाज की समाज को अपने पंजे में जकड़े हुए…
